वैलेंटाइन्स डे की कहानी: संत वैलेंटाइन का ईश्वर प्रेम और शहादत

“पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय|
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय||”

कबीरदास जी की इन पंक्तियों की तरह अनगिनत दार्शनिक, कवि, कथाकार आदि प्रेम की महिमा का बखान कर चुके हैं| आप उनका आनंद लें|प्रेम अपने सबसे मूल प्रारूप में श्रीमद्भगवद्गीता में बताया हुआ भक्ति मार्ग ही है| जिस मोक्ष की प्राप्ति के लिए राज और कर्म योग से कठिन साधना करनी पड़ती है, जिसको ज्ञान मार्ग से समझना अत्यंत विषम है, प्रेम यानी भक्ति मार्ग से उस मोक्ष की सहज प्राप्ति हो जाती है! परन्तु इस प्रस्तुति में हमारा आशय प्रेम पर मंथन करना नहीं, अपितु वैलेंटाइन्स डे की रोचक और प्रेरणादायी गाथा से आपको अवगत कराना है|

14 फरवरी का दिन कई लोगों के दिल को उमंग व रोमांच से भर देता है| अत्यंत हर्षोल्लास के साथ इस दिन पूरी दुनिया में  वैलेंटाइन्स डे मनाया जाता है| दुकानें सुन्दर उपहारों से सजी रहती हैं| प्रेमी युगल उपहारों का आदान प्रदान करके अपने प्रेम को प्रकट करते हैं| जीवन रुपी अथाह सागर को पार करने के लिए एक दूसरे के साथ की नौका को अपनी प्रतिबद्धता से और सशक्त करते हैं| आइये जानते हैं प्रेम के प्रतीक इस पर्व के पीछे का प्रेरणादायक इतिहास| वैलेंटाइन डे के आरम्भ के प्रमाणिक ऐतिहासिक तथ्य मिलने मुश्किल हैं, इनपर शोध चलता रहता है| पर आज हम किम्वदंतियों में प्रचलित पौराणिक कहानियों के सफ़र पर आपको ले चलते हैं|

वैलेंटाइन (valentine) शब्द लैटिन मूल के valens से आता है, जिसका प्रयोग निर्भीकता, महानता, बल और वीरता के लिए किया जाता है| अंग्रेजी का valour शब्द भी इसी मूल से आता है| वैलेंटाइन नाम के कई संत हुए, पर वैलेंटाइन्स डे से जुड़े हुए संत माने जाते हैं तीसरी शताब्दी के रोम के संत वैलेंटाइन [1]|  उन दिनों रोम में ईसाई धर्म प्रचलित नहीं था और ईसाई धर्म के अनुयायियों को रोम के प्रशासन से बहुत सी प्रताड़ना सहनी पड़ती थी| बड़े कष्ट में उनका जीवन गुज़र रहा था| ऐसे प्रतिकूल समय में भी ईसाई धर्म के अन्य संतों की तरह संत वैलेंटाइन भी धैर्य और सेवा भाव से अपने धर्म का प्रचार करते थे|

उस काल में रोम आस पास के कई राज्यों से युद्ध में फंसा  हुआ था| ऐसे में वहां के सम्राट क्लॉडिअस गोथिकस (Claudius II) का मानना था की प्रेम युवा सैनिकों को कमज़ोर बनाता है| परिवार उनके लिए बेड़ियों का काम करता है|अपनी सेना को मज़बूत बनाए रखने के लिए सम्राट ने एक कठोर आदेश जारी कर दिया कि रोम की सेना का कोई भी युवक शादी नहीं कर सकेगा [2]| इस आदेश से रोम की सेना के युवकों के पैरों तले ज़मीन खिसक गयी| वे सभी अपनी प्रेमिकाओं से अलग होने के लिए मजबूर गए|

संत वैलेंटाइन प्रेम के मूल पवित्र भाव से परिचित थे| उनके अनुसार किसी को भी प्रेम से वंचित रखना नैतिक रूप से अनुचित था| सभी संतों का प्रेम के बारे में अक्सर ऐसा ही विचार होता है| हमारे यहाँ आदिकवि वाल्मीकि जी ने भी संस्कृत साहित्य का पहला श्लोक प्रेम से वंचित होने की पीड़ा पर ही रचा था| एक दिन महर्षि वाल्मीकि अपने शिष्य भारद्वाज के साथ नित्य स्नान के लिए जा रहे थे| शुद्ध जल की धारा लिए तमसा नदी के किनारे उन्होंने प्रेम में रत सारस के एक जोड़े को देखा| सुबह के शालीन वातावरण में शुद्ध जल और प्रेम मग्न सारसों को देखकर उनका मन बड़ा प्रसन्न हुआ और उन्होंने सृष्टि के रचयिता परम ब्रह्म को मन ही मन प्रणाम किया| किन्तु तभी सहसा नर सारस को एक तीर आकर लगा और उसकी तुरंत मृत्यु हो गयी|कष्ट में विलाप करते हुए उसकी प्रेमिका सारस ने भी प्राण त्याग दिए| यह हृदयविदारक दृश्य देखकर वाल्मीकि जी बहुत दुखी हुए| वाल्मीकि जी ने जब तीर चलाने वाले निषाद को देखा तो उनके मुख से भावावेश में निकला :

“मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः।
यत्क्रौंचमिथुनादेकम् अवधीः काममोहितम्॥'”
(हे निषाद! तुझे अनंतकाल तक प्रतिष्ठा ना मिले कयोंकि तूने प्रेम में रत सारस के जोड़े में से एक की हत्या की है|)

यह संस्कृत साहित्य का पहला श्लोक माना जाता है| बाद में इसी छंद में महर्षि वाल्मीकि ने रामायण की रचना की| यह विडम्बना ही है कि आजकल अपने आपको हिन्दू धर्म का रक्षक समझने वाले कुछ संगठन अपने मूल धर्म से इतने दूर चले गए हैं कि महर्षि वाल्मीकि के उस शाप को भूलकर वैलेंटाइन डे के दिन प्रेमी युगलों को प्रताड़ित करने का मौका खोजते रहते हैं| परन्तु वाल्मीकि जी का शाप आज भी सिद्ध है और ऐसे संगठनों को समाज में अपनी किरकिरी ही करानी पड़ती है [3]!

संत वैलेंटाइन भी इसी प्रकार प्रेम की क्षति होते हुए देखकर दुखी थे और सैनिकों से उनकी बहुत सहानुभूति थी| सम्राट के क्रूर और अनैतिक आदेश के प्रतिकार में वे गुप्त रूप से रोम के सैनिकों और उनकी प्रेमिकाओं का विवाह संपन्न करवाने लगे| धीरे-धीरे सभी सैनकों को प्यार के इस मसीहा के बारे में पता लगने लगा| उनके हाथ में बैंगनी रंग के एक विशेष रत्न (Amethyst) की अंगूठी होती थी|  उस अंगूठी को देखकर रोम के सैनिक उनको पहचान जाते थे और अपनी प्रेमिका के साथ उनके पास अपनी दुखभरी कहानी सुनाने पहुँच जाते थे| उनकी ज्ञान और  सहानुभूति  से परिपूर्ण बातों से उनको हिम्मत और सहारा मिलता था| अंततः वे अपनी प्रेमिकाओं से विवाह कर पाते थे|

धीरे धीरे संत वैलेंटाइन के साहस की यह गाथा सम्राट तक भी पहुँच गयी| सम्राट ने उनको तुरंत बंदी बनाने का आदेश दे दिया| सम्राट ने स्वयं उनसे धर्म पर चर्चा करने की सोची| सम्राट वैसे तो उनकी शालीनता और ज्ञान से प्रभावित हुआ पर जब संत वैलेंटाइन ने अपने ईसाई धर्म को छोड़कर सम्राट के धर्म को मानने से इनकार कर दिया, तब उसने क्रोधित होकर संत वैलेंटाइन को मौत की सजा सुना दी| जेल में रहते हुए भी रोम के अधिकारी उनके तेज व शालीनता से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके| उस जेल के जेलर अॅस्तेरियस (Asterius) ने संत वैलेंटाइन से अपनी अंधी बेटी जूलिया को ठीक करने की प्रार्थना की| संत वैलेंटाइन ने उसकी बेटी के आँखों की रोशनी लौटा दी| अपनी सजा के दिन उन्होंने दुनिया का पहला वैलेंटाइन कार्ड उस लड़की जूलिया को लिखा जिसमें उन्होंने उसको हिम्मत बंधाई और अंत में अपने हस्ताक्षर में लिखा “your valentine” [4]| वैलेंटाइन्स डे के कार्डों को इसीलिए सिर्फ “वैलेंटाइन” भी कहा जाता है|

धर्म में अपने प्रेम और आस्था के लिए इस प्रकार 14 फरवरी, 269 ई. को संत वैलेंटाइन ने अपने प्राण त्याग दिए| आज उनकी अस्थियों के अवशेष दुनिया के कई गिरिजाघरों में संजोकर रखे गए हैं, जहां लोग प्रेम के प्रति उनके समर्पण के लिए उन्हें श्रद्धांजलि देने आते रहते हैं| ईश्वर के सर्वोच्च प्रेम के लिए सर्वोच्च  बलिदान की ऐसी अनेक कथाएँ सभी धर्मों में हमें प्रेरित करती हैं | चाहे वो मृत्यु के सामने भी अपने ईष्ट को न छोड़ने वाले प्रह्लाद हों, धर्म के लिए वीरता से अपनी जान देने वाले सिख गुरु हों या सजदे में अपनी जान देने वाले हुसैन अली| विधि का न्याय देखिये कि जिस प्रेम को सम्राट ने कमजोरी समझा, उसके दम पर वैलेंटाइन (valentine का अर्थ निभीक, वीर, बलवान होता है) नाम के संत ने मौत की विभीषिका को भी पराजित किया और अंतिम समय तक अपने धर्म को नहीं छोड़ा|

File:St-valentine 110921-01.jpg

[डबलिन आयरलैंड में संत वैलेंटाइन के कुछ अस्थि-अवशेषों की समाधि| छविस्रोत: Wikimedia Commons]

आधुनिक समय में वैलेंटाइन्स डे को प्रेमी-प्रेमिका युगल से जोड़ने का श्रेय इंग्लैंड के प्रसिद्ध मध्यकालीन कवि  जॉफरी चॉसर (Geoffer Chaucer) को जाता है| इंग्लैंड के महाराज रिचर्ड द्वितीय (Richard II) की सगाई की पहली सालगिरह पर लिखी अपनी कविता (1382 ई.) में चॉसर लिखते हैं :

“For this was on seynt Volantynys day
Whan euery bryd comyth there to chese his make”.

[“For this was on St. Valentine’s Day, when every bird cometh there to choose his mate.” “संत वैलेंटाइन के दिवस पर हर पंछी (प्रेम पंछी! love bird!) अपने मीत को चुनता है|” ]

बाद में वैलेंटाइन डे पर पातियों के आदान-प्रदान की परंपरा शुरू हुई| 1840 ई. में डाक टिकट के आविष्कार के मात्र एक साल बाद ही इंग्लैंड में 400,000 वैलेंटाइन संदेश भेजे गए [5]! बाद में व्यक्तिगत संदेशों की इस परंपरा में सुन्दर कार्ड भी जुड़ गए| 1868 में इंग्लैंड की चॉकलेट कंपनी कैडबरी (Cadbury) ने वैलेंटाइन डे के लिए  दिल के आकार वाले चॉकलेट के बक्से बनाना शुरू किया|  आज यह परंपरा लगभग एक शताब्दी से ऊपर से चली आ रही है, लोग संदेशों, कार्डों और चॉकलेट का आदान प्रदान करके अपना प्रेम व्यक्त करते हैं| फेसबुक, व्हात्सप्प आदि माध्यमों से यह और भी सुगम हो गया है|

File:Card; valentine card - Google Art Project.jpg

[लन्दन म्यूजियम में रखा एक वैलेंटाइन कार्ड| छविस्रोत: Wikimedia Commons. ]

आप सभी के वैलेंटाइन्स डे के बारे में क्या विचार और क्या किस्से हैं? हमसे कमेंट में साझा करें| ईश्वर आप सभी को प्रेम की पराकाष्ठा प्रदान करे| Happy Valentines Day ❤ !

(This article is a “valentine” to our team member and dear friend Saurav, who has embarked on a journey to find his life partner. We wish him all the best and hope that he eventually finds his soulmate!)

References:

[1] Roman Martyrology, Libreria Editrice Vaticana, 2001, p. 141

[2] David James Harkness, Legends and Lore: Southerns Indians Flowers Holidays, vol. XL, No. 2, April 1961, University of Tennessee Newsletter (bimonthly), p. 1

[3] “Valentine’s Day: Fear stalks couples on day of love”. The Times of India. February 14, 2012.

[4] Ansgar, 1986, p. 59. It originated in the 1797 edition of Kemmish’s Annual, according to Frank Staff, The Valentine and Its Origins (London, 1969), p. 122. Ansgar was unable to corroborate this

[5] Vincent, David. Literacy and Popular Culture: England 1750–1914. Cambridge University Press. pp. 44, 45.

 

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