कैसे बनती है एनीमेशन की स्वप्निल दुनिया

जंगल जंगल बात चली है पता चला है। चड्ढी पहन के फूल खिला है पता चला है। कितनों को ही बचपन में हर इतवार दूरदर्शन पर टकटकी लगाए बस एक ही धारावाहिक का इंतज़ार रहता था। मोगली और शेरखान के बीच चल रही स्टोरी की तो ज्यादा समझ नहीं थी उस वक़्त लेकिन फिर भी एक अजब तरीके का खीचाव था इस धारावाहिक की ओर। एक समय के बाद डिज्नी स्टूडियो के कुछ बहुत ही मशहूर कार्टून्स दूरदर्शन पर प्रसारित होने लगे। टेलस्पिन और डक टेल्स मेरे पसंदीदा हुआ करते थे।

शायद कभी इसके बारे में सोचा न हो परंतु आपको यह जानकर आश्चर्य होगा की एनीमेशन बनाने में कितनी तकनीकी का इस्तेमाल होता है। किसी ज़माने में एनीमेशन बनाने का मतलब होता था मैन्युअली एक एक फ्रेम को बनाना फिर उनको किसी स्थायी फ्रेम रेट से एक के बाद एक दिखाना। ऐसा करने से गति का आभास होता है और कहानी जो एक एक फ्रेम में निर्जीव लगाती है, जीवंत हो उठती है। आप पूछेंगे ऐसा भला क्यों होता है? मानव मस्तिष्क में कई सारे visual cortices होते है जो image processing के लिए उत्तरदायी होते है। जब हम अपनी आखों से कोई चित्र देखते है तो यह जानकारी electrical signals में बदलकर हमारे मस्तिष्क के visual cortices तक पहुँचती है और वहाँ मौजूद neurons को उत्तेजित करती है। ऐसा होने से हमें  उस चित्र की पहचान होती है। पर यह सब होने में कुछ समय अवश्य लगता है। यदि किसी निश्चित समय में हमें किसी निश्चित सीमा से अधिक चित्र दिखाए जाये तो हम सभी चित्रों को अलग अलग पहचानने में असमर्थ होंगे। परन्तु यदि यह सारे चित्र random ना हो बल्कि किसी गतिमान वस्तु की समय के साथ बदलती अवस्था को प्रदर्शित करते हो तो इन चित्रों को एक के बाद एक तेज गति से देखने पर हमारे मस्तिष्क को motion की अनुभूति होती है। सबसे पहले इस trick का इस्तेमाल phenokistiscope नाम के उपकरण में किया गया था। इस उपकरण में एक वृत्ताकार तख्ते पर एनीमेशन के एक एक फ्रेम को क्रमबद्ध तरीके से radially संजोया गया होता था। इस वृत्ताकार तख्ते को घूमाने पर एनीमेशन का आभास होता था | 

Optical_illusion_disc_with_man_pumping_water
Source : https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Optical_illusion_disc_with_man_pumping_water.gif

इस प्रभाव को gif image format से आसानी से समझा जा सकता है। प्रस्तुत तीनों gifs एक ही image  sequence को अलग अलग समय अंतराल पर दिखा रहे है।  पहले gif  में सारे frames २ fps की गति से (यानि २ फ्रेम्स प्रति सेकेंड) दिखाए जा रहे है। इस gif  में एक एक फ्रेम के परिवर्तन को आसानी से महसूस किया जा सकता है। बाद के दो gifs में इस गति को बड़ा देने पर हर फ्रेम को अलग अलग पहचानना कठिन है और ये गिरती हुई गेंद की दशा को उपयुक्त तरीके से प्रदर्शित करते है।

आज के समय में भी एनीमेशन बनाने के इसी प्रभाव का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि कम्प्यूटर के आने के बाद से अब एनीमेशन के हर फ्रेम को बनाने के लिए घंटो का मानव श्रम लगाने की जरूरत नहीं होती। कंप्यूटर इस कार्य के लिए कैसे उपयोगी साबित होते है, यह इस लेख की चर्चा का विषय है।

एक बार कहानी के तैयार हो जाने के बाद सबसे पहला काम कहानी के पात्रों और कहानी के परिवेश का डिजिटल ढांचा तैयार करना होता है। ये डिजिटल मॉडल्स पात्रों और परिवेश के त्रिआयामी संस्करण को पूरी तरह से प्रदर्शित करते है। अतः इनका इस्तेमाल एनीमेशन के हर फ्रेम में थोड़े परिवर्तन के बाद सीधे किया जा सकता है। इन सभी डिजिटल मॉडल्स की बाहरी सतह को कंप्यूटर के अंदर छोटे छोटे द्विआयामी बहुभुजों से प्रदर्शित किया जा सकता है जैसा की नीचे चित्र में दिखाया गया है।

polygonMesh

इन बहुभुजों की संख्या एवं माप को बदलकर हर प्रकार के आकार दिये जा सकते है। अतः इनका इस्तेमाल करते हुए यथार्थ से लेकर काल्पनिक दुनिया की कोई भी चीज़ बनायी जा सकती  है। अंदरूनी तौर पर कम्प्यूटर को केवल इन बहुभुजो के संग्रह के बारे में जानकारी संचित करनी होती है। इसलिए सभी डिजिटल मॉडल्स को कंप्यूटर मेमोरी में रखने का यह एक सामान्य तरीका है। उदाहरण के लिए, एक घन को प्रदर्शित करने के लिए हमें घन के सभी ६ कोनों  के 3d coordinates एवं कौन कोने मिलकर बहुभुज बनाते है, इसकी आवश्यकता होती है।

cubeMeshDef

जिस प्रकार कोई कुम्हार मिटटी पर चोट कर कर के उसे मनपसंद आकार देता है उसी प्रकार 3d artists इन बहुभुजों की संख्या, आकार एवं 3d coordinates के साथ खेल करते हुए साधारण से लेकर अकल्पनीय चीजें बना सकते है।

इस क्रम में दूसरा काम इन सभी डिजिटल मॉडल्स को rig करना होता है। इस प्रक्रिया में 3d artists डिजिटल मॉडल्स को एनीमेशन के लिए जरूरी हड्डियों का ढांचा प्रदान करते है। ऐसा करने से एनीमेशन के दौरान काफी सुविधा हो जाती है। किसी भी पात्र के डिजिटल मॉडल को किसी भी pose में ले जाने के लिये underlying polygon collection एक एक कर के manually बदलने की बजाय 3d artists हड्डियों को आवश्यक pose में स्थापित कर सकते है। Rigging के बाद ये सारे बहुभुज अपने पास की हड्डियों का अनुगमन करते है जैसा की नीचे प्रदर्शित किया गया है।

2017-07-21_23-33-05

Rigged 3d मॉडल्स को एनिमेट करने के लिए 3d artists मॉडल को इन हड्डियों का इस्तेमाल करके कुछ महत्वपूर्ण मुद्राओं में स्थापित करते है। यदि ये मुद्राएं एक दूसरे से बहुत भिन्न न हो तो बीच की मुद्राओं को इन हड्डियों की ज्यामिति के अंतर्वेशन (interpolation) का उपयोग करके उत्पन्न किया जा सकता है। उदहारण के लिए किसी character की चाल को एनिमेट करने के लिए केवल कुछ मुद्राओं को rig का इस्तेमाल करते हुए मैन्युअली स्थापित करना होगा। नीचे दिखाए जा रहे चित्र के अनुसार पूरी चाल को एनिमेट करने के लिए केवल ४ मुद्राएं काफी है।

walk cycle

 

वास्तविक दुनिया में हर वस्तु अलग अलग रंगों की हो सकती है। साथ ही साथ उसकी बाहरी सतह के अलग अलग गुण हो सकते है जैसे की चिकनाई, खुरदुरापन, चमकीलापन पारदर्शिता आदि। पुराने समय में जब कलाकार एक एक एनीमेशन फ्रेम को खुद paint किया करते थे तब रंगो के सही चुनाव से वे इन aspects का ध्यान रखते थे। साथ ही साथ प्रकाश के स्रोतों एवं परीणामस्वरूप बन रही परछाइयों का ध्यान भी painting artists को खुद ही रखना पड़ता था। एनीमेशन प्रक्रिया में कंप्यूटर इस काम के लिए भी बहुत उपयोगी साबित होते है। एनीमेशन प्रक्रिया में शायद यह तकनीकी रूप से सबसे चुनौतीपूर्ण कार्य है। यहाँ पर प्रकाश और द्रव्य के आपसी interaction के बारे में हमारा ज्ञान हमारे काम आता है। प्रक्राश जब किसी द्रव्य की सतह पर गिरता है तो प्रकाश का कुछ हिस्सा सतह से परावर्तित(reflect) हो जाता है और कुछ हिस्सा द्रव्य के भीतर प्रवेश करता है (refraction). द्रव्य के भीतर प्रवेश करने के बाद प्रकाश का कुछ हिस्सा प्रवेश करने वाली सतह से ही बाहर निकल जाता है (subsurface scattering). उल्लिखित आचरण अलग अलग अनुपात में हो सकता है। यह अनुपात ही द्रव्य के looks को define करता है। यदि सारा प्रकाश परावर्तन के नियम का पालन करते हुए सतह से टकराकर वापस लौट जाता है तो यह द्रव्य किसी चमकीली वस्तु जैसे दिखाई देती है। अगर प्रकाश का ज्यादातर हिस्सा सतह के भीतर प्रवेश करते हुए दूसरी सतहों से बाहर निकलता है तो यह कांच या पानी जैसा पारदर्शक प्रतीत होता है।

प्रकाश और द्रव्य के इस परस्पर प्रतिक्रिया के अनुरूप computational model बनाकर इस प्रतिक्रिया को हम कंप्यूटर के भीतर simulate कर सकते है। किसी 3d scene को 2d चित्र में परिवर्तित करने की यह गणना कुछ इस प्रकार होती है। 3d scene में कुछ प्रकाश के स्रोत एवं एक camera होना जरूरी है। प्रकाश स्रोत से विकिरित हो रही किरणों के मार्ग को trace किया जाता है (raytracing). यदि किरण scene में उपस्थित किसी द्रव्य की सतह पर गिरती है तो सतह के गुण के अनुसार प्रकाश किरण परावर्तित (reflect) अथवा अपवर्तित (refract) हो सकती है। बहुत सारे परावर्तन / अपवर्तन के बाद कुछ किरणें camera  के aperture तक  पहुँचती है। इन किरणों का रंग और दिशा 2d चित्र के pixel के रंग को निर्धारित करता है। यही प्रक्रिया हमें अपने आस पास की चीजों को देखने में मदद करती है। हालांकि यथार्थ में गणना के लिए ठीक इसका उल्टा किया जाता है, किरणों को camera से scene में भेजा जाता है। ऐसा करने से बहुत सारी अनावश्यक गणना करने की जरूरत नहीं होती। (ध्यान दे की यहाँ वही किरणें जरूरी है जो प्रकाश स्रोत से camera तक पहुँचती है।)

BasicRayTracing_1

इस अवस्था में पहुंचने के बाद characters और environment के बीच का इंटरेक्शन एनीमेशन के लिए तैयार होता है। बस एनीमेशन के 3d scene को 2d images में रूपांतरित करना बचा होता है। ऐसा करने के लिए एक computational camera model  की आवश्यकता होती है। यह computational  model 3d scene  के किसी भी बिंदु को बनने वाले चित्र के pixel से जोड़ता है। इस गणना का सबसे आसान रूप एक matrix multiplication हो सकता है जिसका काम (x , y , z ) coordinate को चित्र के pixel coordinates (i , j ) तक ले जाना हो। अंततः सभी 3d मॉडल्स को कुछ material प्रदान किया जाता है। यह material  ही इन  मॉडल्स की प्रकाश की साथ प्रतिक्रिया को निर्धारित करते  है और सभी मॉडल्स एवं पर्यावरण को रंग प्रदान कर जीवंत बनाते है।

Disclaimer: This article gives brief insight into the technology which goes in creating awesome animated movies we see today. The technique suggested in the article for doing specific things may actually be not used in practice all the times but basic ideas remain the same. If you are super crazy about animated movies check out some of the few short movies linked below.

 

Resources:

  1. http://pixar-animation.weebly.com/pixars-animation-process.html
  2. http://www.techradar.com/news/world-of-tech/inside-dreamworks-how-animated-movies-are-rendered-1127122
  3. https://en.wikipedia.org/wiki/Ray_tracing_(graphics)
  4. https://jplackett.wordpress.com/geometric-theory/

 

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