Materials की दुनिया का सुपरमैन : Superconductor (Audio Available)

(इस लेख को बड़ी लगन के साथ अपनी अप्रतिम प्रतिभा से निर्देशित व स्वरांकित किया है नेहा और आनंद ने | उनकी इस कृति को आनंदपूर्वक सुनकर superconductors से परिचित होने के लिए इस लिंक पर जाएँ |)

दिनभर की मेहनत के बाद शाम को पूरी ऊर्जा से अपनी solid state की क्लास ली प्रोफेसर नेहा ने | आज वे थक तो बहुत गयीं थीं , परन्तु फिर भी परम संतोष की मुस्कान लिए अपने  घर की तरफ चलती जा रहीं थी |

उन्होंने घर की चाबी लगायी और दरवाज़ा खोला | दरवाज़ा खोलते ही उनके पतिदेव आनंद दरवाज़े पर लम्बी सी मुस्कान लिए  खड़े मिले | दरअसल आनंद जो कि चार्टर्ड अकाउंटेंट थे, आज अपनी जॉब से जल्दी घर आ गए थे |

नेहा : ” My God आनंद ! आज बड़ी जल्दी छुट्टी हो गयी तुम्हारी | एक मैसेज ही कर देते ! डर के मारे जान ही निकाल दी तुमने !”

आनंद (हंसी से पेट पकड़ते हुए ) : ” हा हा हा ! देखने लायक शक्ल थी तुम्हारी ! आज सोचा घर आ गया हूँ तो क्यों न श्रीमती जी को surprise दिया जाए ! तुम्हारी class का समय मुझे पता था | जल्दी से फ्रेश हो जाओ, गरमा-गर्म पकौड़े और चाय तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं |”

नेहा : ”  Thanks ! आज तो काफी थक गयी मैं | चाय संजीवनी है मेरे लिए |”

आनंद : ” हम्म ! तो आज क्या पढाया बच्चों को देवी जी ?”

नेहा : ” आज बहुत मज़ा आया, आज का पाठ superconductors पर था |”

आनंद (आश्चर्य से ) : ” सुपरमैन तो सुना है, यह superconductor  क्या बला है ?”

नेहा  (चाय की चुस्की लेते हुए ) : ” Materials की दुनिया का सुपरमैन ही समझो इसे | जैसे सुपरमैन gravity के नियम तोड़कर हवा में उड़ सकता है | आम लोगों से कई गुना शक्तिशाली है | उसी तरह superconductor को भी नियमों से अलग, materials का एक नया state ही समझो |”

आनंद (अपनी चाय उठाते हुए ) : ” लो कर लो बात ! मुझे तो लगता था की materials के तीन ही states होते हैं : solid, liquid और gas | ऐसी भी क्या ख़ास बात है इस superconductor में ? ”

नेहा : ” अगर तुम किसी भी चीज में करंट का बहाव चाहते हो तो तुम्हें एक voltage source जैसे बैटरी चाहिए | अब एक बैटरी से कितना करंट संभव है , वह जिस चीज में करंट बहता है , उसका resistance यानी प्रतिरोध तय करता है |”

आनंद (मजाकिया लहजे में ) : ” मैडम जी | थोड़ी बहुत Physics दसवीं कक्षा तक हमने भी  पढ़ी है, Ohm’s Law यह निर्धारित करता है की कितना करंट बहेगा Voltage = Current times Resistance ! ”

नेहा (मुस्कराते हुए ) : ” बहुत अच्छे मेरे स्मार्ट पतिदेव ! superconductor का electrical resistance शून्य होता है ! अगर इसकी एक अंगूठी बनाकर उसमें करंट बहा दिया जाए तो यह करंट अनंतकाल तक बिना किसी voltage source के अंगूठी में  के चक्कर लगाता रहेगा !”

आनंद (चाय की घूँट बीच में ही गिराते हुए और आँखें बड़ी करते हुए ) : ” क्या !?  ऐसा भी होता है ? फिर दुनिया वाले क्यों बेवकूफी में copper यानी ताम्बे के तारों का प्रयोग करते हैं | बिजली का अधिकतर नुकसान तो एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में इसी resistance के कारण होता है | और अगर resistance शून्य संभव हो जाये फिर तो न जाने technology में कैसी क्रांति आ जाएगी ! कैसी कैसी मशीनें संभव हो सकेंगी ! मतलब …”

नेहा (बीच में टोकते हुए ) : ” अपनी एक्सप्रेस ट्रेन को थोडा ब्रेक लगाओ dear ! तुम्हारा कहना सही है, पर आजतक superconductor सिर्फ बहुत ठन्डे तापमान पर ही मिलते हैं | हमारे फ्रीजर के तापमान शून्य से भी नीचे ! ”

आनंद (असमंजस से भौंह सिकोड़ते हुए ) ” मतलब ?”

नेहा : ” मतलब यह कि मेरे भोले पतिदेव ! जैसा मैंने कहा कि superconductor, material का एक state है, जैसे पानी को ठंडा करने पर 0 डिग्री सेल्सियस पर बर्फ बनती है, उसी तरह अगर कुछ materials, जैसे टिन, mercury यानी पारा, या एल्युमीनियम आदि को ठंडा करते जाओगे तो एक तापमान पर अचानक उनका resistance शून्य हो जायेगा ! पहले यह तापमान liquid helium से प्राप्त किया जाता था, मतलब शून्य से लगभग 269 डिग्री सेल्सियस नीचे ! पर वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत से आज ऐसे नए materials संभव हैं जहां liquid nitrogen का तापमान काफी है , मतलब शून्य से 196 डिग्री सेल्सियस नीचे !”

आनंद : ” समझा ! इसलिए अभी हर जगह इसका उपयोग नहीं हो रहा है | पर शून्य resistance से तो काफी फायदे होते  होंगे ? इनका कोई उदाहरण भी तो बताओ dear !”

नेहा : ” अभी कुछ दिन पहले ही तो नानी का MRI स्कैन हुआ था | MRI यानी magnetic resonance imaging, के लिए एक बहुत शक्तिशाली magnet यानी चुम्बक चाहिए | जो magnet स्पीकर वगरह में होता है, वह इतना ताकतवर नहीं होगा..”

आनंद (बीच में काटते हुए ) “इसमें कौन से बड़ी बात है ? स्कूल में पढ़ा था हमने कि अगर तारों की coil या कुंडली बनके उसमें करंट दौडाएं तो भी magnet बनाया जा सकता है |इसका मतलब जितना शक्तिशाली मैगनेट चाहिए उतना करंट दौड़ा दो और.. ”

नेहा (जवाबी हमला करते हुए !): ” याददाश्त अच्छी है तुम्हारी, इतने साल लेखा जोखा करके भी विज्ञान को दिमाग में संजोकर रखा है तुमने  (दोनों हँसते हैं )| पर अफ़सोस कि तुम्हारा यह सुझाव असंभव है !”

आनंद : “वह कैसे भला ?”

नेहा : “अभी हम जिस resistance की बात कर रहे थे, उसके कारण | अभी जो चाय की प्याली तुमने पकड़ रखी है, उससे तुम्हें shock नहीं लग रहा क्यूंकि इसमें negative और positive चार्ज बराबर मात्र में हैं और  इसका कुल चार्ज शून्य है | बिजली के तार में भी यह चार्ज शून्य ही होता है | जब तुम तार को बैटरी जोड़ते हो , तब negative चार्ज, जिनको electron कहते हैं , वह बैटरी से दी गयी energy यानी ऊर्जा के कारण बहना शुरू करते हैं, जिसको करंट कहते हैं |”

आनंद : ” यह तो सबको पता है मैडम ! बड़ी बैटरी , या voltage source लगाओ और जितना चाहे करंट बहा लो !”

नेहा (मुस्कराते हुए ) : ” पूरी बात तो सुनिए जनाब ! positive चार्ज को भूल गए ? यह तो तुम्हें पता होगा कि कोई भी वस्तु atoms यानी अणुओं से बनी होती है | पॉजिटिव चार्ज इन्हीं atoms के केंद्र होते हैं, जिनको nucleus कहते हैं और वे इलेक्ट्रान से लगभग  2000  गुना अधिक भारी होते हैं |”

आनंद : ” ओह ! इसका मतलब करंट वाले electrons की राह आसान नहीं ! मतलब खरगोश के झुण्ड को हाथियों के झुण्ड से गुज़रते हुए जाना होगा |”

नेहा : ” वाह वाह ! क्या उदाहरण दिया है ! मेरी संगत का कुछ तो असर हो रहा है तुम पर | जब भी कोई खरगोश , यानी electron, किसी हाथी, यानी nucleus से टकराता है, तो उसकी चाल की दिशा बदल जाती है | अब चूंकि खरगोशों के समूह का कोई न कोई सदस्य हाथियों से टकराकर अपना रास्ता भटकता रहता है, खरगोशों के पूरे समूह को एक दिशा में चलने में , यानी करंट में मुश्किल आती है ! इन्हीं टकरावों के कारण ही किसी भी material का resistance शून्य होना असंभव है, क्योंकि हर material में atoms यानी nucleus रुपी हाथी होंगे ही | और खरगोशों, यानी electrons, की जो ऊर्जा ऐसे लड़ने भिड़ने में जाती है, वो गर्मी के रूप में बाहर  आती है | इसीलिए किसी भी material में करंट बहाने से उसमें  गर्मी पैदा होगी , जो टकराव से करंट के सीमित होने का यानी resistance शून्य न होने का ही परिणाम है |”

आनंद  (थोड़े निराश स्वर में ) : ” मैं समझ गया की मेरा magnet वाला आईडिया क्यों नहीं चलेगा ! ज्यादा करंट बहाने पर ज्यादा टकराव होंगे और बहुत ज्यादा गर्मी पैदा होगी | ताम्बे के तार तो गल ही जायेंगे !”

नेहा : ” बिलकुल ठीक ! हमारे घरों में लगे फ्यूज इसी सिद्धांत पर टिके हैं, जिस करंट के लिए फ्यूज बना है , उससे ज्यादा करंट बहने पर वह गर्मी  से  पिघलकर टूट जाता है | पर पतिदेव, हमारे सुपरमैन को इतनी जल्दी भूल गए ?”

आनंद (मानों नींद से जागते हुए ) ” अरे हाँ ! superconductor !!! उसका resistance तो शून्य होता है | मतलब उसमें तो बिलकुल गर्मी पैदा नहीं होगी | तो हम MRI का शक्तिशाली magnet superconductor के तारों से बना सकते हैं , भले ही  उनको ठंडा करने के लिए थोड़ी मेहनत करनी पड़े |

नेहा  (आनंद की उत्तेजना में स्वर मिलते हुए ): ”  YES ! यही नहीं, एक बार magnet की कुंडली में करंट बहाकर छोड़ दिया तो फिर वह करंट उसमें हमेशा के लिए घूमता रहेगा | जबतक कुंडली को ठंडा रखोगे, यानी superconductor state में रखोगे, तब तक किसी power source की जरूरत भी नहीं पड़ेगी !”

आनंद (खुश होते हुए ) : “Wow ! ऐसे शक्तिशाली magnet से तो और भी कई चमत्कार किये जा सकते होंगे ?”

नेहा : “जापान में maglev नाम की ट्रेन बनायी जा रही है  जो ऐसे शक्तिशाली magnet वाली पटरियों पर , हवा में  500 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार से उडती है ! कुछ लोग बिजली के वितरण में भी superconductors के प्रयोग के बारे में सोच रहे हैं | ज़रा सोचो, अगर बिजली बांटने में resistance शून्य होगा तो ऊर्जा भी गर्मी में व्यर्थ नहीं होगी | इससे बचने वाली ऊर्जा , ठंडा रखने के खर्च को बराबर कर सकती है और बचने वाली ऊर्जा से कई और घर रोशन हो सकते हैं | न्यूयॉर्क में ऐसे वितरण के प्रयोग के लिए तार बिछाए गए हैं |”

आनंद : ” Amazing ! इसका मतलब superconductor हमारे लिए सच में सुपरमैन से कम नहीं ! ”

इसके बाद दोनों कुछ समय तक प्रसन्नता से पकौड़े खाते रहे और चाय की चुस्कियां लेते रहे | थोड़ी देर के बाद

आनंद : “नेहा, पर जो तुमने टकराव वाली बात बताई, किसी material को ठंडा करने पर जब वह superconductor बन जाता है, तब भी उसके atom और उनके भारी केंद्र, nucleus तो कहीं गए नहीं ! फिर  electron, यानी खरगोश बिना nucleus यानी हाथियों  से भिड़े  कैसे चलते चले जाते हैं ?”

नेहा प्रेमपूर्वक अपने पति को बहुत देर तक निहारतीं हैं फिर

नेहा : “अब इसको लेकर बैठ गए तो पूरी रात निकल जाएगी | इसके लिए  Stephen Blundell की यह किताब Superconductivity: A Very Short Introduction पढो | यह बहुत छोटी से किताब है जिसमें कहानियाँ किस्से ही भरे हैं | इससे तुम्हें सारे राज़ पता चल जायेंगे !”

आनंद (थोड़ी शिकायत करते हुए ) : ” यह क्या नेहा ? अब इतना सबकुछ बताकर ऐसा क्यूँ होता है यह नहीं बताया तो फिर आज नींद नहीं आएगी !”

नेहा : ” पतिदेव, इस गुत्थी को सुलझाने में वैज्ञानिकों को 50 साल लगे ! मैं बस इतना कह सकती हूँ की इस नए superconducting state में इन खरगोशों का अलग अलग अस्तित्व नहीं रहता | पहले वे जोड़े बना लेते हैं | और खरगोशों का पूरा झुण्ड ऐसे जोड़ों की एकता से बना होता है जो एक साथ एक दिशा में चलते जाते हैं | किसी एक जोड़े को तोड़कर झुण्ड से अलग करने में, यानी superconductor state से बाहर लाने में ऊर्जा लगेगी | जैसे बर्फ से पानी बनाने के लिए, यानी एक state से दूसरे state में ले जाने के लिए , उसे गर्मी देनी पड़ती है | हाथियों से टकराने से जो ऊर्जा का परिवर्तन संभव है, वह ऊर्जा इस superconductor state  की एकता को तोड़ने के लिए काफी नहीं होती | इसलिए खरगोशों के इस झुण्ड की एकता वाली गति को हाथियों के टकराने से नहीं बदला जा सकता, यह तभी संभव है जब इनकी एकता को तोडा जाये | यह तभी संभव है जब इतनी ऊर्जा दे दो, या इतना गरम कर दो , जिससे material  superconductor ही ना रहे |”

आनंद : ” चलो मान लिया, पर मुझे पूरा उल्लू मत समझो ! electron तो समान चार्ज वाले हुए, फिर हमने स्कूल में पढ़ा था की समान चार्ज एक दूसरे से दूर भागते हैं, और विपरीत चार्ज एक दूसरे के करीब आते हैं, जैसे हम दोनों (दोनों हँसते हैं) | opposites attract, likes repel | फिर ये electrons जोड़े कैसे बनाते हैं? यह आखिरी सवाल  promise, फिर दोनों किचन में जाकर रात के खाने की तैयारी करेंगे |”

नेहा : ” चलो यह भी शंका दूर किये देती हूँ , जैसा तुमने अभी कहा की opposites attract, जब एक electron बहता हुआ जाता है तो आस पास के positive चार्ज वाले nucleus उसके पास हल्का सा खिंचे चले आते हैं , अब electron तो हल्का होने के कारण गुज़र जाता है, पर उसके रास्ते में उसके पास आकर्षित हुए भारी भरकम nucleus उतनी जल्दी वापस अपनी जगह नहीं जाते, उनका यही क्षणिक जमावड़ा, electron के रास्ते में उसके पीछे पीछे  हल्का सा positive चार्ज बनाता चलता है और  एक दूसरे electron को गुज़रे हुए electron की तरफ आकर्षित करता है |”

आनंद : ” वाह ! सच में मज़ा आ गया ! सब कुछ तो समझ नहीं आया पर वह पुस्तक जरूर खरीदूंगा और तुमसे वापस चाय पर चर्चा करूंगा | सुपरमैन तो काल्पनिक हीरो है, पर यह superconductor विज्ञान का बनाया असली सुपर हीरो है | तुम्हारे जैसे वैज्ञानिकों को इसके रहस्यों को समझने के लिए और इसको और अधिक तापमान पर प्रायोगिक बनाने के लिए शुभकामनाएँ | ”

लेखक : superconductors पर इस लेख का उद्देश्य मात्र परिचय कराना व उत्सुकता जगाना है, यह लेख कई प्रकार से अपूर्ण है , पर मंथन के लिए आप सभी का स्वागत है | अपने प्रश्न फेसबुक की पोस्ट पर भेजते रहे और बाकी साथियों के साथ मंथन करते रहे |

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