नन्ही सी तितली खड़ा कर सकती है तूफ़ान ! भौचक कर देने वाली Chaos Theory

1961 की एक सर्द रात को MIT के गणितज्ञ व मौसम विशेषज्ञ Edward Lorenz अपने कंप्यूटर पर मौसम सम्बंधित कुछ गणना कर रहे थे | इस गणना को अधिक गहराई से समझने के लिए वे बार बार यह गणना करते और अलग अलग महीनों  के मौसम सम्बंधित परिणामों  का अध्ययन करते रहते |उन दिनों कंप्यूटर हमारे ज़माने की तरह तेज तर्रार नहीं होते थे ! छोटी छोटी गणनाओं में भी बहुत धैर्य रखना पड़ता था | उन्हें बीच के किसी महीने का मौसम देखना था | उन्होंने सोचा कि शुरू से पूरी गणना क्यों करें ? उन्होनें पिछली गणना से प्राप्त उसी महीने के पहले के परिणाम डालकर गणना शुरू कर दी |  काफी देर रात तक ठण्ड में  अकेले काम करते करते उन्होंने सोचा कि चलो एक कॉफ़ी पी आते हैं | कंप्यूटर को चलता छोड़ वे कॉफ़ी पीने चल दिए | वापस आने पर जो कुछ उन्होंने देखा, उसने उन्हें तो भौचक किया ही, आने वाले समय में यह विज्ञान को एक नयी दिशा देने वाला था |

उन्होंने पाया कि इस बार के नतीजे उनकी पिछली गणना से बिलकुल ही अलग थे.| थोडा बहुत अंतर तो समझ में आता है, पर इतना विशाल अंतर ? मानों की पिछली और इस बार की गणना में कोई सम्बन्ध था ही नहीं !सबसे पहले उन्हें लगा की जरूर कंप्यूटर ही ख़राब है | उन्होंने कंप्यूटर को पूरी तरह परखा | जब वे संतुष्ट हो गए की कंप्यूटर में कोई खराबी नहीं है, तब उन्हें समझ आया की उन्होंने पुराने नतीजे लिखते समय एक अंक .506127 को .506 डाला था | अंतर दशमलव के चौथे अंक तक का ही था, परन्तु  दस हजारवें हिस्से के इस बिलकुल मामूली अंतर से बिलकुल ही भिन्न परिणाम संभव हुए | यहीं से chaos theory  आधुनिक विज्ञान में पदार्पित हुई | (पहले भी कई वैज्ञानिक ऐसे मॉडलों का अध्ययन कर चुके थे , परन्तु Lorenz के 1963 के लेख के बाद ही आधुनिक समय में यह  theory प्रचालन में आई | )

Chaos का शाब्दिक अर्थ है : अराजकता | परन्तु यहाँ किसी भौतिक system में chaos का सही अर्थ है : यदि प्रारम्भिक परिस्थितियों में एक अत्यंत सूक्ष्म परिवर्तन से परिणाम में ऐसा बहुत बड़ा अंतर आये जिसका कोई भी पूर्वानुमान असंभव हो, तो ऐसे system को chaotic कहा जाता है  | एक उदाहरण जैसा की आपने अभी पढ़ा, मौसम है | तितली के कश्मीर में पंख हिलाने से कन्याकुमारी में तूफ़ान संभव है | (ऐसा ही एक वाक्य एक सम्मलेन में किसी ने कहा, जिससे इस प्रभाव को “Butterfly Effect” का प्रसिद्ध नाम मिला , शब्दों पे ज्यादा न जाइये !) आजकल यह विज्ञान कई जगह महत्त्वपूर्ण है , मसलन ट्रैफिक के अध्यययन में, कंप्यूटर की नयी प्रोग्रामिंग में, Genetics में आदि |

आपको विश्वास नहीं होता की ऐसा कैसे संभव है ? चलिए आपको अभी chaos के दर्शन करवाते हैं ! आपके लिए एक सरल उदाहरण प्रस्तुत है |
x_{n+1} = 4x_n(1-x_n)

जैसा कि स्पष्ट है, यह एक श्रृंखला है , आप किसी एक अंक x_n (0 से 1 के बीच में ) से शुरू करेंगे तो आपको अगला अंक x_{n+1} प्राप्त होगा | फिर इस परिणाम x_{n+1} को सूत्र में डालने से x_{n+2} प्राप्त होगा | इस प्रकार यह श्रृंखला अनवरत चलती जाएगी | कैलकुलेटर पर यह आसानी से किया जा सकता है | क्या ? वह पुराने ज़माने की चीज लगाती है आपको और आप आजकल अपने साथ नहीं रखते ? चलिए कोई बात नहीं ,कैलकुलेटर भी हम ही दिए देते हैं आपको | यदि आप इस लिंक : “calculator “ पर क्लिक करेंगे तो एक  नए टैब में गूगल कैलकुलेटर खुल जायेगा आपके लिए | (www.google.com पर जाकर सर्च बार में calculator लिखके सर्च करने से एक कैलकुलेटर हाज़िर हो जाता है |)

  • 0 से 1 के बीच का कोई अंक कैलकुलेटर में डालिए : मसलन 0.4
  • [=] बटन दबाइये ([]  चिन्ह बटन दर्शाता है )
  • अब निम्नलिखित बटन दिये गये क्रम से दबाइये :
    • [4] [Ans] [(] [1] [-] [Ans] [)]
    • [=]
  • जो अंक आया उसे लिखकर नोट कर लीजिये
  • पुनः [=] दबाने पर इस श्रृंखला का एक नया अंक आ जायेगा उसे भी नोट कर लें
  • इसी तरह [=] दबाते जाइये और अंक नोट करते जाइये
  • घबराइए मत ! और कम से कम डटकर 30 अंक तो नोट कीजिये ही ! मौसम विज्ञान की जटिल गणनाओं के बिना यदि एक महत्त्वपूर्ण भौतिक प्रभाव समझना है तो इतनी मेहनत तो बनती है ! मुझे पता है आपके अन्दर का वैज्ञानिक  बिना प्रमाण देखे किसी बात पर यकीन नहीं करेगा !
  • अब यही क्रम एक सूक्ष्म परिवर्तन , मसलन 0.400001 के साथ दोहराइए, देखिये की सिर्फ दस लाखवें  हिस्से का फर्क है
  • शुरू के दस अंक लगभग आस पास रहेंगे , 20 अंकों के पास आपको अंतर स्पष्ट समझ आने लगेगा , 30 अंकों तक जाते जाते, आप विश्वस्त हो जायेंगे की अंकों में अराजकता है !
  • (यदि लिखने में आलस आ रहा हो तो दो कैलकुलेटर प्रयोग करें , यदि दो कैलकुलेटर ना हों आपके पास तो  ऊपर बताये गये तरीके से दो गूगल वाले कैलकुलेटर खोल लें| | एक में 0.4 से शुरुआत करें, दूसरे में 0.400001 के साथ )

अपनी आँखों से देखने के बाद इसकी गहराइयों को समझते हैं | आपने देखा की अंक सिर्फ भिन्न ही नहीं, बिलकुल इस तरह से भिन्न हैं कि एक को देखकर दूसरे के बारे में  कोई भी अनुमान लगाना असंभव है | दोनों श्रृंखलाओं में किसी भी प्रकार का कोई सम्बन्ध नहीं स्थापित किया जा सकता |यह एक बहुत गूढ़ सत्य है ! न्यूटन के बाद सभी को लगता था , यदि आपके पास किसी भौतिक परिस्थिति के नियम हैं , मसलन गुरुत्वाकर्षण के नियम , तो यदि आप उस परिस्थिति को एक समय पर जानते हैं तो दूसरे किसी भी समय पर उस परिस्थिति को उन नियमों की सहायता से हमेशा ज्ञात किया जा सकता है | मसलन रोज़मर्रा की अनेक परिस्थितियों में  (जैसे धरती का सूरज की परिक्रमा करने में ) यह सत्य है | लोगों को लगता था कि ब्रह्माण्ड एक सुनियोजित उपकरण की तरह हमेशा तय नियमों से चलता है | व्यवस्था, अनुशासन, रीति  हमारे ब्रह्माण्ड का परम चरित्र है |

परन्तु Chaos Theory इस धारणा को ध्वंस करती है ! ब्रह्माण्ड कुछ परिस्थितियों में बिलकुल अराजक हो सकता है ! ऐसी परिस्थितियाँ संभव हैं , जहां उसके नियम तो आप गणित में लिख सकते हैं, परन्तु उस परिस्थिति का किसी दूसरे समय पर किसी भी प्रकार का अनुमान लगाना असंभव है | ऐसा इसलिए है क्योंकि किसी भी परिस्थिति  को आप असीमित शुद्धता से नहीं जान सकते, मसलन अगर वज़न नाप रहे हैं , तो सब्जी वाले से 100 ग्राम तौलने को कहेंगे तो  उसके तराजू के हिसाब से 101 ग्राम या 99 ग्राम भी हो सकता है| यदि सोनार से कहें तो शायद उसका तराज़ू 100.01 तक सही मान दे दे  | पर फिर भी अगर वज़न 100.000001 ग्राम हुआ तो ? जैसा की आपने देखा की अगर परिस्थिति chaotic तो सूक्ष्म से सूक्ष्म अंतर एकदम भिन्न परिणाम दे सकता है | यदि आपको नहीं पता कि आपका माप 100 ग्राम है या 100.000001 ग्राम, तो chaotic परिस्थिति के अन्दर आप अपने परिणाम पर बिलकुल भरोसा नहीं कर सकते !

पर घबराइए मत ! धरती अपनी कक्षा को छोड़ कहीं उडी नहीं जा रही , न ही आपकी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी के बाकी विज्ञान और तकनीकी के वरदान अराजक होकर सब अस्त व्यस्त करने वाले हैं  ! सभी प्रकार की भौतिक परिस्थितियाँ chaotic नहीं होतीं | अधिकतर ऐसी परिस्थितियाँ साधारण से थोड़ी जटिल (बिना ज्यादा कहे अगर कहना चाहें तो गणित की भाषा में non-linear) , किन्तु महत्त्वपूर्ण और व्यापक होती हैं | मौसम , ट्रैफिक, कुछ द्रव्यों जैसे शहद का बहाव, बैक्टीरिया का चलन, genetics के कुछ नियम  आदि ऐसे अनेक उदाहरण हैं जहाँ अराजकता का राज हो सकता है और किसी भी प्रकार की उपयोगी जानकारी के लिए chaos theory के रहस्यों को समझना आवश्यक है | इस विषय पर Steven Strogatz ने Nonlinear Dynamics and Chaos नामक एक बहुत ही उत्तम व सरल किताब लिखी है | यदि इंजीनियरिंग अथवा विज्ञान पढ़ते समय विश्वविद्यालय के स्तर पर यदि कोई भी सरल सा गणित का कोर्स यदि आपने किया है , तो यह पुस्तक आपके लिए आसानी से पठनीय है |

कॉलेज के ज़माने में मेरे अभिन्न मित्र अनिल और मैंने मिलकर आपके उपर कैलकुलेटर पे किये गए एक प्रयोग से थोडा जटिल (परन्तु chaos theory के उदाहरणों में से बहुत ही सरल ) प्रयोग किया था | उसमें हमने 1 के बजाय 3 ऐसी श्रृंखलाओं की गणना की | उन्हें छोटी छोटी गोलियों से दर्शाया जिनका स्थान, x,y,z वो तीन श्रृंखलाएं हैं | गोलियों के रंग , प्रकाश के मूलभूत रंग लाल, हरे और नीले से मिलकर बने हैं | इन रंगों का मिश्रण भी उन तीन श्रृंखलाओं के आधार पर किया गया है | जो संगीत सुनाई देता है , उसमें भी स्वरों क चयन उन तीन श्रृंखलाओं से ही एक नियम के तहत किया गया है | अर्थात गोलियों का चलन , उनका रंग एवं बजने वाला संगीत सभी अराजक हैं !

अनिल के साथ मैंने थोड़े बहुत और भी खेल किये हैं इस विषय से सम्बंधित | आशा है मैं और अनिल भविष्य में उनको भी मंथन के लिए प्रस्तुत कर सकेंगे |

आपके सभी प्रश्नों का स्वागत है | मैं महज़ आप सभी की तरह विज्ञान का एक उत्सुक छात्र हूँ, सो जरूरी नहीं की सभी प्रश्नों का उत्तर दे पाऊं, परन्तु मंथन करने के लिए हम सभी सदैव तत्पर हैं ! 🙂

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